हिमाचल के सियासी गलियारों में आजकल केन्द्रीय इस्पात मंत्री की एक सी डी खासा बबाल मचाये हुए है. इस सी डी में वीरभद्र सिंह और उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह को अपने शासन के दौरान लोगों के काम करने की एवज में पैसा वसूलने की बातचीत करते हुए रिकार्ड किया गया है. यह बातचीत तत्कालिन उद्योग निदेशक महेंद्र लाल के साथ हुयी बताई जा रही है. हालाँकि महेंद्र लाल अब नहीं हैं लेकिन यह सी डी अब सूबे में सियासी जंग का नया हथियार बनी हुयी है. दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप जरी हैं. कांग्रेस इसे वीरभद्र सिंह के खिलाफ साजिश बता रही है तो भाजपा का कहना है की उसके शासन में तो सिर्फ सी ऍफ़ एल की रिपोर्ट आई है बाकि की तमाम कारवाई वीरभद्र के शासन काल में ही हुयी है.
अब कौन सही है कौन नहीं यह तो वक्त ही बय्तायेगा लेकिन इस बहाने उन तमाम सीडियों और टेपों की यादें ताज़ा हो उठी हैं जिन्होंने समय-समय पर यहाँ की सियासत में सुर्खियाँ बटोरी हैं. यदि समय के लिहाज़ से देखा जाये तो मौजूदा रेकार्डिंग सबसे पुरानी है. कहा जा रहा है की वीरभद्र सिंह और महेन्द्रलाल के बीच यह बातचीत वर्ष १९८९ में हुयी है.
इस लिहाज़ से इसे आप सबसे पुरानी सी डी या टेप कह सकते हैं,लेकिन सबसे पहले जो टेप बाहर आया था वोह एक महिला नेत्र का था.
कांग्रेस की पूर्व मंत्री रह चुकी यह महिला नेता तब नयी-नयी विधायक बनी थीं और जो टेप आई थी उसमें उनकी और राज्य के एक बड़े नौकरशाह के बीच बातचीत रिकार्ड की गयी थी. इस बातचीत में दोनों को काफी अतरंग बातें करते पकडा गया था.संभवतया दोनों में प्रेम सम्बन्ध थे. दोनों के यह बात तब एक पत्रकार और पुलिस के एक बड़े अधिकारी ने मिलकर रिकार्ड की थी. हालाँकि इसपर कोई कारवाई नहीं हुयी थी लेकिन उस टेप ने काफी सुर्खियाँ बटोरी थीं. कहा जाता है की बाद में रेकार्डिंग करने वालों ने उसका इस्तेमाल अपने काम निकलवाने के लिए किया.बहरहाल जहाँ वोह पुलिस अधिकारी कई साल पहले सेवानिवृत हो चुके हैं वहीं पत्रकार महोदय का खादी का झोला भी अब चोला बन चुका है.
उसके बाद अगली रेकार्डिंग २००४ में तब आई थी जब प्रदेश में ताज़ा-ताज़ा सत्ता परिवर्तन हुआ था और कांग्रेस ने सरकार संभाली ही थी. कांग्रेस की जीत में धूमल पर चिट्टों पर नौकरियां बाँटने के आरोपों ने अहम् भूमिका निभाए थी लेकिन अचानक सामने आई सी डी में पता चला की ऐसा काम खुद कांग्रेसी करते रहे हैं.
राज्य अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के तत्कालिन चेयरमैन एस एम् कटवाल द्वारा जरी उस टेप में वीरभद्र सिंह को चहेतों को नौकरी दिलवाने की सिफारिश करते हुए सुना गया था. यही नहीं वीरभद्र काबीना के तीन मंत्रियों सिंघी राम,कुलदीप कुमार और चंद्रेश कुमारी की आवाजें भी इसमें कैद थीं जिन्हें भी नौकरी की सिफारिश करते हुए पाया गया था. यह सी डी भी खासी चर्चा में रही थी और तीन किश्तों में जारी हुयी थी.
उस सी डी को लेकर तब सूबे की सियासत काफी गरमाई थी,कई दिन तक विपक्ष ने विधान सभा में हंगामा खडा किया था. लेकिन बाद में मामला दब गया था या यूं कह लें की दबा दिया गया था. यहीं नहीं सी डी जारी करने वाले कटवाल सरकार के कोप का भजन भी बने थे. यहाँ तक की एक मामले में उन्हें सजा भे हो गयी थी. लेकिन कुलमिलाकर वोह मामला सत्ता और सियासत के दावपेंचों में फंसकर रह गया. यहाँ तक की तब उस सी डी से हार की खीज मिटने वाली भाजपा ने भी दोबारा सत्ता में लौटने पर उस मामले की सुध नहीं ली.
इसी तरह पूर्व कांग्रेस सरकार के समय तत्कालीन परिवहन और पर्यटन मंत्री जी एस बाली के खिलाफ भी एक सी डी आई थी.
यह बाकायदा एक विडियो सी डी थी जिसे एक निजी चैनल ने बाली के जन्मदिवस की पार्टी के मौके पर फिल्माया था. कहा गया था की बाली ने उस पार्टी मैं बारबालाओं का न सिर्फ डांस करवाया बल्कि खुद भी उनके संग ठुमके लगाये. इस सी डी ने रातों-रत बाली को कुर्सी से उतर फैंका था.बाली को तब इस सरे मामले मैं इस्तीफा देना पड़ा था.हालाँकि बाद मैं बाली मामला कोर्ट मैं ले गए थे और अभे तक यह तय नहीं हो पाया है की बाली निर्दोष थे या चैनल सही था. पर यह तय है की बाली को उस सी डी के कारन काफी राजनितिक नुक्सान हुआ है,हालाँकि वोफ चुनाव जरूर जीत गए थे अपर उस मामले की तीस आज भी उनके चेहरे पर साफ़ झलक जाती है जब चर्चा होती है.
सियासतदानों के अलावा एक पुलिस अफसर की भी सी डी आ चुकी है. यह पुलिस अफसर ए डी जी बी एस थिंड थे.
हालाँकि थिंड कई मामलों में विवादस्पद रहे हैं लेकिन जो सी डी सामने आई थी वोह रंगदारी से सम्बंधित थी. इसमें थिंड को परवानू के एक व्यापारी से डरा-धमका कर पैसा वसूलने की कोशिश करते हुए रिकार्ड किया गया है. हालाँकि यह सी डी थिंड की धमकियों से तंग आकर उसी व्यापारी ने बनाई थी. इस पर मामला भी दर्ज हुआ था और थिंड की आवाज के इसमें साबित होने की बात भी पुलिस ने कही थी..लेकिन नतीजा क्या रहा था यह पता नहीं चल पाया.शायद मामला दब गया या जानबूझ कर नहीं निकला जा रहा.
इस तरह अब तक करीब आधा दर्जन सीडियां या टेप हिमाचल में जारीहो चुकी हैं लेकिन सबमें एक बात सांझी है की किसी भी मामले में आज तक कोई नहीं नाप पाया. ऐसे में इस ताज़ा सी डी का क्या होगा..क्या सच सामने आ पायेगा या अतीत अपने को दोहराएगा इसपर कयास जारी हैं.
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Born in 1971 at Hamirpur, Sanjeev has been a freelancer initially. He was the sub-editor of Ajit Samachar HIMACHAL EDITION at Jalandhar for 3 years when he shifted to Broadcast journalism with Nalini Singh’s famous AANKHON DEKHI. In 1998, he joined ZEE NEWS as a reporter for Shimla, joining MH-1 Newa in January 2007.
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