बेटी वालों और खासकर बेटी पैदा करने वाली बहूओं को भले ही हमारे समाज में हिकारत की नजर से देखा जाता हो पर अब हिमाचल पूरे देश को बताएगा की बेटी वाले कितने खास हैं और बेटी कितनी अनमोल है.
दरअसल हिमाचल सरकार ने हाल ही में दो ऐसे कदम उठाये हैं जो देश भर मैं जारी कन्या भ्रूण ह्त्या से निबटने वाले अभियान को नयी दिशा देंगे. इसमें कोई शक नहीं की तमाम प्रयासों के बाबजूद देश भर में लिंग अनुपात तेज़ी से गिर रहा है और कुछ राज्यों में तो हालत काफी खराब है. जाहिर हाई की जो प्रयास किये जा रहे हैं वोह या तो नाकाफी हैं या फिर नीयत से नहीं किये जा रहे. ऐसे में हिमाचल ने जो किया है वोह निश्चित ही इस अभियान को नयी जन और दिशा देगा.
हिमाचल प्रदेश ने अपने यहाँ कन्या भ्रूण ह्त्या रोकने और लिंग अनुपात को सुधारने के लिए दो महतवपूर्ण योजनायें शुरू की हैं.
पहली योजना है “बेटी अनमोल है ” यह खास अभियान है जिसके तहत राज्य के सभी १५ लाख घरों में एक माह के भीतर पहुँच कर बेटी बचने का सन्देश दिया जा रहा है.
देश भर में यह अभियान इसलिए अनूठा है की अबसे पहले किसी भी राज्य में किसे भे सर्कार ने ऐसा नहीं किया.यहाँ तक की महिला शासित प्रदेश भी इस मामले को इतने प्रभावी ढंग से नहीं उठा पाए जैसा की हिमाचल ने किया है. अब तक के तमाम बेटी बचाओ अभियान विज्ञापनों और सरकारी कागजों में ही चल रहे थे. या फिर ज्यादा से ज्यादा अस्पतालों के बाहर टंगे “यहाँ भ्रूण की लिंग जांच नहीं होती ” या फिर बसों के पीछे “बेटी बोझ नहीं ” जैसे नारों वाले बोर्ड ही इस अभियान को आगे बढा रहे थे. यह पहली बार हुआ है की किसी राज्य के हर घर में जागरूकता जत्थे पहुँच कर लोगों को यह बता रहे हैं की बेटी कितनी अनमोल है. इसके लिए सरकार ने 1600 जत्थे बानाए हैं. इनमें सरकारी विभागों के अलावा विभिन्न स्वंयसेवी संस्थाओं के कार्यकर्त्ता शामिल हैं. यह जागरूकता जत्थे हर घर में जाकर आंकडों सहित लोगों को यह समझा रहे हैं की यदि कन्या शिशु दर इसी तरह गिरती रही तो आने वाले बरसों में किस तरह लडकियां ढूंढें नहीं मिलेंगी और फिर किस तरह समाज में संतुलन बिगड़ जायेगा. साथ ही सरकार की तरफ से लड़कियों के लिए चलाई जा रही विशेष योजनाओं जिनमें कन्या के जन्म, उसकी पढाई और यहाँ तक की विवाह के समय दी जाने वाली सहायता की जानकारी भी दी जा रही है.
हालाँकि यह अभियान स्वास्थ्य विभाग की देख-रेख में चलाया जा रहा है लेकिन इसके पीछे मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की निजी सोच है. मुख्यमंत्री के अनुसार एक दिन वोह इस बाबत आंकडों के रिपोर्ट देख रहे थे. हालाँकि हिमाचल की लिंग अनुपात काफी बेहतर है लेकिन जो आंकडे दिए गए थे उसके मुताबिक 2019 में इस दर के मुताबिक तीन लड़कों पर एक लडकी और 2031 में सात लड़कों पर एक लडकी रह जायेगी. जाहिरा तौर पर हम ऐसी स्थितियां नहीं चाहते लिहाजा काफी सोच विचार के बाद हमने फैसला लिया की वक्त आ गया है की लोगों को उनके घर पर जाकर हकीकत से रू-ब-रू करवाया जाये. और इस तरह नींव पडी इस अनूठे अभियान “बेटी अनमोल है ” की जो देश भर में अपनी किस्म का पहला है.
यही नहीं सरकार ने राज्य में भी इस अभियान को शशक्त बनाने के लिए बेहतर कन्या शिशु दर वाली पंच्यातों को पॉँच लाख का नकद पुरस्कार देने का भी फैसला किया है.
” लेकिन इसके बाबजूद मुझे लगा की यह भी नाकाफी होगा लिहाज़ा हमने एक और योजना शुरू की है ‘..धूमल बताते हैं.
इस योजना के तहत हिमाचल आने वाले पर्यटकों को इस अभियान से जोड़ने का विचार आया और अब सरकार ने तय किया है की बेटी वाले पर्यटकों को हिमाचल टूरिज्म के होटलों में किराये पर तीस फीसदी छूट दी जायेगी. यही नहीं दो दिन के ठहराव पर तीसरा दिन निशुल्क होगा और कोई किराया नहीं वसूला जायेगा.
“यह बेटी की तरफ से मां-बाप के लिए तोहफा होगा “….धूमल बताते हैं.
यानि पहले दो दिन तक तीस फीसदी की छूट के बाद तीसरा दिन बिलकुल फ्री…इस तरह से करीब-करीब पचास फीसदी का लाभ होगा. लेकिन सरकार का मन्ना है की इस बहाने बेटी वाले जहां खुद को सम्मानित महसूस करेंगे वहीं बेटी उनके लिए बोझ के बजाये जब इज्ज़त का सबब बनेगी तो वोह इसका चर्चा दूसरी जगहों पर भी करेंगे. और कहीं न कहीं यह बात कन्या भ्रूण ह्त्या को रोकने में सहायक होगी. मुख्यमंत्री के अनुसार पूरे प्रदेश में हिमाचल टूरिज्म के होटलों में करीब पांच हज़ार कमरे हैं. ऐसे में यदि हर साल पॉँच हज़ार कमरों पर रियायत भी देनी पड़े तो कोई बड़ी बात नहीं हाँ यदि हमारी इस योजना से यदि पांच सौ दंपति भी लडकी का मान-बाप बन्ने की प्रेरणा लेते हैं तो हमारा उदेश्य हाल हो जाता है जो बड़ी उपलव्धि होगी. यही नहीं धूमल इस अभियान को आगे बढाने के लिए अब बाहर से आने वाले पर्यटकों को बेटी संग आने की स्थिति में बस किराये मैं भी छूट देने की सोच रहे हैं. .यानि बेटी वाले सर आँखों पर.




















