दूसरों की प्यास बुझाने वाला खुद प्यासा क्यों? “विश्व जल दिवस”

योजनाओं के प्रदेश में जल आपूर्ति परियोजनाओं की भले ही कमी ना हो परन्तु यह भी कटु सत्य है कि प्रदेश में आज भी पानी की कमी है| एक तरफ जहां तकरीबन 36 ह्जार लीटर पानी मिनरल वाटर ऊद्योग के जरिये निर्यात किया जा रहा है वहीं प्रदेश में दस करोड लीटर पानी की प्रतिदिन कमी आंकी गई है|रैणुका बांध परियोजना की बात करें तो यह दिल्ली वासियों की प्यास बुझाएगी, जो भी हो हिमाचल के दूर दराज का ग्रामीण आज भी मिलों दूर से अपनी प्यास बुझाने को मजबूर है|water.jpg

पीने के पानी का उपयोग बडे पैमाने पर सिंचाई के लिए भी किया जा रहा है|
नदी नालों और बांवडी तालाबों के प्रदेश में पानी की कमी आखिर क्यों होने लगी है? चिन्ता का विषय है|
वनों के लगातार कटान के साथ साथ जल प्रबंधन में दोष का खामियाजा प्रदेश की आबादी का एक बडा हिस्सा झेल रहा है| हर घर में पानी की कमी बताई जा रही है|
आज दूसरों की प्यास बुझाने वाले प्रदेश को यह भी सोचना होगा कि आखिर वह खुद क्यों प्यासा है|

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