व्यंग्य : एक मूर्ख ढूंढो हजार मिलेंगे …Part-II

वैसे ‘ऑफ दि रिकार्ड्’ आपको बता दूं कि ऐसा सर्वेक्षण होने पर अपुन भी बच नही पायेंगे| अपने मूर्ख होने की बात मैंने अब तक केवल अपनी बीबी के श्रीमुख से ही सुनी है और किसी दूसरे महानुभाव ने मुझे आज तक कभी मूर्ख होने का खिताब नही दिया| सर्वेक्षण होने पर अपुन के मूर्ख होने की बात पूरी दुनिया में फैल जाएगी लेकिन देश हित और जन हित के लिए अपुन यह रिस्क लेने के लिए तैयार है| अब जबकि बात अपुन की चली है तो सच्ची मुच्ची यानी साफ साफ बता देना चाहता हूं कि मूर्ख होने का खिताब हमें शादी के दूसरे दिन ही मिल गया था जब नई नवेली बीवी ने यह उलाहना अपुन के मुख पर दे मारा था कि ‘ कैसे जीजा हो? अपनी सुंन्दर सलोनी साली की तरफ आंख उठाकर भी नही देखा|

बेचारी को अपनी सहेलियों के सामने कितनी इन्सल्ट झेलनी पडी|’ इसके बाद भी एक नही, सैंकडौं ऐसे मौके आए जब बीवी के मुखारबिंद से हमें मूर्ख, महामूर्ख, मूर्खाधिपति और मूर्खाधिराज जैसे संबोधन सुनने को मिले और अपुन ने भी एक दिन गुस्से में भन्नाते हुए बीवी के सामने फट्टाक से दोनों हाथ जोड्ते हुए ये स्वीकार कर लिया कि ‘अपुन सचमुच इस दुनिया के सबसे बडे मूर्खानंद हैं जो तुमसे शादी कर ली|’ बीवी ने यह सुनकर क्या कहा, मैं उसे ऑफ दि रिकार्ड रखना चाहता हूं| पति परमेश्वर हूं और पर्सनल लाईफ की बातें कैसे पब्लिकली हाईलाईट कर सकता हूं?

मैं अपने होश संभालने से लेकर आज तक कितने मूर्खों के सम्पर्क में आ चुका हूं, मुझे ठीक से याद नही है लेकिन इतना मैं दावे से कह सकता हूं कि मेरे अस्सी फीसदी दोस्त मूर्ख हैं| क्योंकि एक तो वे हर बात पर सहमति जताते हैं और दूसरा उन्हें मेरी प्राब्लमज से कोई लेना देना नही होता| बीस फीसदी दोस्तों को मैं इसलिए मूर्ख नही मानता क्योंकि वे बात बात पर टोकाटाकी करते हैं और भारतीय नेताओं की तरह एक मसले पर अलग अलग तरह के बयान देते रहते हैं| लेकिन कोई यह ताना न मारे कि सारे दोस्त मूर्ख हैं इसलिए मैंने कुछ बुद्धिमानों को भी उसी तरह अपना दोस्त बना रखा है जैसे कोई नेता अपने को सभी वर्गों का सर्वमान्य नेता कहलाने के लिए अपनी बिरादरी के बहुसंख्यक प्रतिनिधियों के साथ साथ दूसरे जाति के कुछ लोगों को भी अपने कुनबे में जोड लेता हैं या फिर किसी सरकार का कोई मुखिया मंत्रिमंडल में सभी को प्रतिनिधित्व देने के नाम पर दूसरी जातियों के दो चार लोगों को भी झंडी प्रदान कर देता है| मेरी राय में इस दुनिया में मूर्खों की तादाद बुद्धिजीवियों की बनिस्बत ज्यादा है और लोकतंत्र में चूंकि बहुसंख्या को ज्यादा अहमियत दी जाती है, इसलिए मैंने ज्यादा से ज्यादा मूर्ख दोस्त बना रखे हैं|

To be cont…………………

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